Tuesday, 19 December 2017

नत्थुआ

मस्त है नत्थुआ
अपनी भेड़ों के झुण्ड को सँभालता
पुचकारता हुँकारता

साथ बनी रहतीं
गर्दन झुकाए
झुण्ड में चलतीं-बैठतीं
कुनबापरस्त मस्त भेड़ें !

अनपढ़ नत्थुआ
एक हुनर का बहुत पक्का 
जैसे जादू-भर से
अपनी मर्ज़ी को वह भेड़ों की मर्ज़ी बना देता
बढ़-चढ़ के आपस में बतियाती भेड़ें
कि चल रहा है सब कुछ उन्हीं के हिसाब से !

दूर-दूर तक निर्जला धरती और
सूखते तालाबों को
देखती नहीं भेड़ें गर्दन उठाकर
काँपती नहीं वे
किसी आसन्न संकट को सोचकर
चलतीं या रुकतीं नत्थुआ की हाँक से
सहज ही एक-दूजे का मुँह जोहते ! 

                    कैलाश नीहारिका

2 comments:

  1. नत्थुआ मस्त रहे अपनी भेड़ों के साथ
    भेड़े मस्त रहे अपने अपने नत्थुओं के साथ ।

    सुन्दर अभिव्यक्ति।

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